पंजाब में रसोई गैस (एलपीजी) की भारी किल्लत ने हालात गंभीर कर दिए हैं। राज्यभर में गैस सिलेंडरों की कमी के चलते आम उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं और लोगों को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा। इस बीच ‘फेडरेशन ऑफ एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स ऑफ पंजाब’ ने चंडीगढ़ प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस संकट के लिए सिस्टम को जिम्मेदार ठहराया है।
फेडरेशन के प्रधान गुरपाल सिंह मान और परविंद्र सिंह ने बताया कि पंजाब में कुल 980 गैस एजेंसियां लगभग 96 लाख उपभोक्ताओं को सेवाएं देती हैं। सामान्य तौर पर हर महीने 27 से 29 लाख सिलेंडरों की डिलीवरी होती है, लेकिन अब सप्लाई में करीब 80 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आ गई है। उन्होंने कहा कि जनवरी में 27 लाख सिलेंडरों की सप्लाई हुई थी, जबकि वर्तमान में स्थिति बेहद खराब हो चुकी है।
डिस्ट्रीब्यूटर्स ने सरकार के 74 दिनों के गैस स्टॉक के दावे पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर इतना स्टॉक उपलब्ध है तो वह जमीनी स्तर पर क्यों नहीं दिखाई दे रहा। एजेंसियों के पास बुकिंग का भारी दबाव है, लेकिन उन्हें बेहद सीमित संख्या में सिलेंडर मिल रहे हैं, जिससे स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
प्लांटों से सप्लाई घटी, बॉटलिंग यूनिट्स बंद होने से बढ़ी दिक्कत
मौजूदा हालात में एक-एक एजेंसी पर करीब 5000 सिलेंडरों की बुकिंग लंबित है, जबकि उन्हें केवल 300 सिलेंडर ही मिल पा रहे हैं। राज्य में मौजूद 8 बॉटलिंग प्लांट हाल ही में दो बार बंद हो चुके हैं, जिससे सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। पहले जहां इन प्लांटों से रोजाना करीब 200 गाड़ियां सिलेंडर लेकर निकलती थीं, अब यह संख्या घटकर मात्र 50 रह गई है।
लुधियाना जैसे बड़े औद्योगिक शहर में भी हालात चिंताजनक हैं, जहां कमर्शियल गैस की भारी मांग के बावजूद सप्लाई पूरी नहीं हो पा रही। इसके अलावा ऑनलाइन बुकिंग सॉफ्टवेयर के बार-बार क्रैश होने से भी उपभोक्ताओं और एजेंसियों दोनों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
पीएनजी को बढ़ावा देने के आरोप, ग्रामीण इलाकों में बढ़ा आक्रोश
फेडरेशन ने आरोप लगाया है कि पाइपलाइन गैस (पीएनजी) को बढ़ावा देने के लिए एलपीजी की अनदेखी की जा रही है। उनका कहना है कि पीएनजी के दामों में 37 रुपये प्रति किलो तक की कटौती की गई है और नए कनेक्शन पर 500 रुपये की छूट भी दी जा रही है, जिससे उपभोक्ताओं को आकर्षित किया जा रहा है।
वहीं, एलपीजी की कमी के चलते ग्रामीण इलाकों में लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। कई जगहों पर डिलीवरी कर्मचारियों का घेराव किया जा रहा है, जिससे उनकी सुरक्षा पर खतरा पैदा हो गया है। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए हैं कि दबाव के चलते एक गैस एजेंसी ने अपना काम तक सरेंडर कर दिया है।
डिस्ट्रीब्यूटर्स का कहना है कि उन्होंने इस मुद्दे को लेकर केंद्र और राज्य सरकार से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो यह संकट और गहरा सकता है, जिससे आम जनता की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।

