IFFS: ‘पंज दरिया फ़िल्म फेस्टिवल’ में बिखरेगी पंजाबियत की खुशबू

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भारतीय कैलेंडर के बसंत पंचमी और अंग्रेजी कैलेंडर वेलेंटाइन को राजस्थान का गंगानगर पंजाबियत से प्यार के जश्न के रूप में मनाने की तैयाती में जुटा हुआ है। IFFS (इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑव श्रीगंगानगर) अपने नए अवतार के रूप में श्रीगंगानगर के पंजाबी इलाके के लिए एक सौगात की तरह पंजाबियत की रूहानी खुशबू लेकर आ रहा है। इस खुशबू को कल्चरल इवेंट के रूप में नाम दिया गया है- ‘पंज दरिया फ़िल्म फेस्टिवल’ फेस्टिवल के फाउंडर डायरेक्टर दुष्यंत और सुभाष सिंगाठिया ने बताया कि कोविड से पहले हुए पहले संस्करण के रूप में आयोजित इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल को इलाके की पसंद, ज़रूरत के मुताबिक इस रूप में सोचा गया है।

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IFFS और नोजगे का संयुक्त आयोजन

उल्लेखनीय है कि शहर को अकादमिक ही नहीं, सांस्कृतिक एक्सीलेंस देने में प्रसिद्ध नोजगे पब्लिक स्कूल की IFFS के साथ इस आयोजन में पहले की तरह ही भागीदारी रहेगी- यानी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑव श्रीगंगानगर और नोजगे पब्लिक स्कूल संयुक्त रूप से इस फेस्टिवल के आयोजक होंगे। नोजगे पब्लिक स्कूल के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ.पी. एस. सूदन कहते हैं कि श्रीगंगानगर और इसके आसपास की फिजा पंजाबियत के रंग से सराबोर है और उन्हें विश्वास है कि ‘पंज दरिया फ़िल्म फेस्टिवल’ जैसे कार्यक्रम पंजाबी कल्चर की समृद्धि में चार चांद लगाएंगे।

क्या-क्या होगा?

इसमें क्लासिक पंजाबी फिल्मों के साथ नई अच्छी फिल्मों को भी दिखाया जाएगा, फ़िल्म निर्देशकों, लेखकों, कलाकारों की उपस्थिति से जीवंत बनाने के साथ-साथ पंजाबियत को संगीत, थिएटर, साहित्य की सतरंगी छटा की तरह सालाना जलसे में आकार दिया जा रहा है।

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पंजाबी डायस्पोरा

पंजाबियत के इस पर्व को दुनिया भर के पंजाबियों की साझी भावनाओं का पर्व बनाने की कोशिश होगी। पंजाबियत अब एक भूगोल तक सीमित नहीं है, वह एक विचार है, इमोशन है, संस्कृति है। सच्ची पंजाबियत अब जाति, धर्म, भूगोल, रंग से ऊपर एक भावनात्मक दर्शन है जो दुनिया भर में फैले पंजाबियों को प्रेम के अदृश्य धागों से जोड़ता है।

कब, कितने दिन

इसे 2023 की फरवरी के अंतिम सप्ताह 25-26-27 फरवरी (शनिवार, रविवार, सोमवार ) को 3 दिन तक मनाया जाएगा। इस दौरान दिन में पंजाबी फिल्मों के प्रदर्शन, चर्चाएं होंगी और हर शाम एक सांस्कृतिक शाम होगी।

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मुख्य आकर्षण

आयोजकों ने बताया कि हम कोशिश में हैं कि पंजाबी कल्चरल दुनिया के नामी और संजीदा चेहरों को इलाके के लोग फेस्टिवल में देख-सुन-मिल सकें।

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