नए संसद भवन की क्यों जरूरत पड़ी? क्या नए संसद भवन के उद्घाटन के बाद पुराने को गिरा दिया जाएगा?

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देश का नया संसद भवन बनकर तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मई को नए संसद भवन का उद्घाटन करेंगे। वहीं संसद भवन के उद्धाटन को लेकर कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियों ने उद्घाटन समारोह में सम्मिलित होने से इनकार कर दिया है। इन पार्टियों का कहना है कि नए संसद भवन का उद्धाटन प्रधानमंत्री की जगह राष्ट्रपति के हाथों होना चाहिए।

इन सब के बीच कई ऐसे सवाल है जो लगातार उठ रहे हैं कि नए संसद भवन के बनने के बाद पुराने संसद भवन का क्या होगा? आखिर नए संसद भवन की जरूर क्यों पड़ी? आइए जानते हैं इन सवालों के जवाब।

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पुराने संसद भवन का क्या होगा?

पुराना संसद एक गुंबददार संरचना। इसे ब्रिटिश वास्तुकार सर एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर ने डिजाइन किया था, जो 1921 से 1927 में छह साल में बनकर तैयार हुआ था। 1921 में ड्यूक ऑफ कनॉट द्वारा इसकी आधारशिला रखी गई थी और 1927 में लॉर्ड और लेडी इरविन द्वारा भवन का उद्घाटन किया गया था। उस समय इसे बनाने में 83 लाख रुपए लगे थे। पुरानी संसद का व्यास 560 फुट यानी 170.69 मीटर है।

इसका क्षेत्रफल छह एकड़ यानी 24281.16 वर्ग मीटर है। इसके प्रथम तल पर 144 स्तंभ हैं और भवन के 12 द्वार हैं। संसद भवन सुंदर बगीचों और फव्वारों से घिरा हुआ है। उस दौर में इस भवन में ब्रिटिश सरकार की विधान परिषद काम किया करती थी। जानाकारी के मुताबिक नये संसद भवन के उद्घाटन के बाद पुराने संसद भवन का इस्तेमाल संसदीय आयोजनों के लिए किया जाएगा।

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नए संसद भवन की जरूरत क्यों पड़ी?

मौजूदा संसद भवन लगभग 100 साल पूराना है। केंद्र के मुताबिक यहां सांसदों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। इस समय लोकसभा सीटों की संख्या 545 है। लेकिन 2026 के बाद सीटों में बढ़ोतरी की संभावना है। नए सांसद चुनकर आते हैं तो पुरानी संसद में उनके बैठने की पर्याप्त जगह नहीं होगी। इसके अलावा यहां सैकड़ों कर्माचरी काम करते है। जिसके चलते संसद भवन में भीड़ काफी हो गई है।

इसके अलावा जब पुरानी संसद का निर्माण हुआ था तब यहां सीवर लाइनों, एयर कंडीशनिंग, सीसीटीवी, ऑडियो वीडियो सिस्टम जैसी तमाम बातों का खास ध्यान नहीं रखा गया था। नए दौर में इन चीजों की आवश्यकता है, जिन्हें नए संसद भवन में जोड़ा गया है।

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